Tarun Upadhyay


भारत की बदलती संस्कृति - Poem by Tarun Upadhyay

कुते को घुमाना याद रहा, और गाय को रोटी देना भूल गये ।
पार्लर का रास्ता याद रहा, लम्बी चोटी भूल गये ।
फ्रीज, एसी, कुलर याद रहा पानी का मटका भूल गये ।
रिमोट तो हमको याद रहा, बिजली का खटका भूल गये ।
बिसलेरी पानी याद रहा, पर प्याऊ का पानी भूल गये ।
टीवी सीरियल याद रहें, पर घर की कहानी भूल गये ।
हेलो हाय तो याद रहा, पर नम्र प्रणाम भूल गये ।
स्टेशन याद रहा, पर चारो धाम को भूल गये ।
अंकल आण्टी याद रहे, पर चाचा मामा भूल गये ।
वरमुडा तो याद रहा पर फुल पजामा भूल गये ।
दोस्त यार सब याद रहे, सगे भाई को भूल गये ।
साली का जन्मदिन याद रहा, पर माँ की दवाई भूल गये।


क्या हो रहा हैं हमारी भारतीय संस्कृति को ।


Comments about भारत की बदलती संस्कृति by Tarun Upadhyay

  • (2/14/2013 6:35:00 PM)


    Valentine day yaad raha basant panchami bhool gaye! Nice to read a Hindi poem. (Report) Reply

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Poem Submitted: Thursday, February 14, 2013

Poem Edited: Friday, February 15, 2013


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