Tarun Upadhyay


Tarun Upadhyay Poems

1. प्यारी माँ 1/3/2013
2. नारी 1/4/2013
3. माँ 1/5/2013
4. नया साल आया है 1/6/2013
5. बढे कदम रुकते नहीं 1/6/2013
6. तेरे शहर से तो मेरा गाँव अच्छा है 1/6/2013
7. जा बेटी तू पराई है 1/6/2013
8. ऐसे बचपन को मैं ढूँढता हूँ 2/13/2013
9. ऐसे बचपन को मैं ढूँढता हूँ 2/13/2013
10. भारत की बदलती संस्कृति 2/14/2013
11. ।। जय माँ शारदा ।। 2/14/2013
12. देश आगे कैसे बढे 2/15/2013
13. ये आज क्यों कोई.. कमी सुलगी 2/16/2013
14. का करिती हम तोहारा आताना झोर झमेल मे आके 2/17/2013
15. यहाँ सब कुछ बिक रहा है 2/17/2013
16. हाँ मैँ गरीब का बेटा हूँ 3/3/2013
17. हाँ मैँ गरीब का बेटा हूँ 3/3/2013
18. 'एक रोटी ' 3/4/2013
19. महिला दिवस है शक्ति दिवस भी 3/7/2013
20. नारी जीवन 3/7/2013
21. राणा प्रताप 5/9/2013
22. रोटी रोटी करता है हर गरीब का पेट 6/11/2013
23. एक बचपन ऐसा भी.. 7/9/2013
24. मैं स्त्री हूँ 3/7/2013
Best Poem of Tarun Upadhyay

मैं स्त्री हूँ

मैं स्त्री हूँ
रत्नगर्भा, धारिणी
पालक हूँ, पोषक हूँ
अन्नपूणा,
रम्भा, कमला, मोहिनी स्वरूपा
रिद्धि- सिद्धि भी मैं ही,
शक्ति स्वरूपा, दुर्गा काली, महाकाली,
महिषासुरमर्दिनी भी मैं ही
मैं पुष्ट कर सकती हूँ जीवन
तो नष्ट भी कर सकती हूँ,
धरती और उसकी सहनशीलता भी मैं
आकाश और उसका नाद भी मैं
आज तक कोई भी यज्ञ
पूर्ण नहीं हो सका मेरे बगैर,
फिर भी
पुरुष के अहंकार ने, उसके दंभ, उसकी ताकत ने,
मेरी गरिमा को छलनी किया हमेशा ही
मजबूर किया अग्नि -परीक्षा देने को, कभी किया चीर-हरण...
उस खंडित गरिमा के घावों की मरहम -पट्टी न कर ...

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नारी

नारी से है हम, नारी से हो तुम,
नारी ही माँ बहन है,
नारी ही है बहू बेटियाँ ।
नारी से घर स्वर्ग बना है,
नारी से ही ये घर नर्क बना है।
नारी से ही जुड़ी है घर की सारी खुशियाँ,
नारी से ही बनी है ये अनोखी दुनिया ।
नारी ही थी वो लक्ष्मीबाई,
अकेले ही दुसमनों से जो लड़ पड़ी।

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