ऐ औरत
तू नही फ़क्त तहजीबे पेरोकार,
तूने किए इंसां पे, एहसान बेशुमार।
तू खादिजा है, तूने मुसीबत मे
मोहम्मद का दिया साथ,
मोहब्बत दी,
दौलत भी दी,
और दी औलाद।
मैदान -ए -जंग मे,
जब पैगम्बर पे हो रहे थे वार,
नुसयबा, तू अाई थी वहाँ,
बऩ के उसकी ढाल।
कैसे करूं बयां
तूने किए हैं जो
कमाल?
ईराक की अजादी से पहले
राबि'या अल -'अडवैया बऩ के,
तूने सहे गुलामी के जुल्मो-ओ-सितम।
एक फ़रिश्ता बऩ तूने की
सूफी फिलशफे की,
रहनुमाई
बे मिसाल
लुबना कोर्डोबा थी,
गुरबत से निकल तूने
इल्म की महारत हांसिल की,
खलीफों की सकत्तर बनी,
गणित, ग्रामर. औॉर
शायरी के शिखर
पहुची तू।
तुम ही अरवा थी
जिसने येमेनी फातिमीद मजहब मे
हांसिल किया इज्जत भरा औधा ।
तुम ही न्यायशाष्त्र मर्मज्ञा
फातिमा ब. अबि हो ।
तुम्हे सलाम।
तुम्हे सलाम।
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