गुलों को चूम लो, न क़ुर्बान करो Poem by C. P. Sharma

गुलों को चूम लो, न क़ुर्बान करो

मैं फूलों से इश्क़ करता हूँ
तहे दिल से इसका इज़हार करता हूँ
इन का रंग और खूशबू ले के
मेरी ज़िन्दगी के चमन को
गुलो गुलज़ार करता हूँ

ए खुदा के इबादतकारों
इन की चंद दिन की जिंदगी पे रहम करो
महक सकते हो तो इन से महक लो
इन को न इबादत में कुर्बान करो
गर सच्ची इबादत करते हो तो
अपने गुमान को कुर्बान करो

गुलों को चूम लो, न क़ुर्बान करो
Tuesday, August 9, 2016
Topic(s) of this poem: flowers
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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