सत्य Poem by C. P. Sharma

सत्य

Rating: 5.0

वो कस्में
वो वादे
ये रिश्ते
ये नाते
सुख -दुःख की यादें
सभी कुछ भुला दे
स्वप्न टूट ने का
वक़्त आ रहा है।

फिर भोर होगी
स्व प्रकाश होगा
फिर गुल खिलेंगे
सच्चिदानंद में विलय का
वक्त आ रहा है।

सत्य
प्रकाशित होने का
वक्त आ रहा है।
आनन्द गायन का
वक्त आ रहा है।
सच से दीदार का
वक्त आ रहा है।

Monday, August 22, 2016
Topic(s) of this poem: truth
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 08 September 2016

बहुत सुंदर. सत्य ईश्वर का ही एक रूप है. सत्य का साक्षात्कार ही ईश्वर का साक्षात्कार है. यही अंतिम सत्य है. सच्चिदानंद में विलय का / वक्त आ रहा है। सत्य / प्रकाशित होने का / वक्त आ रहा है।

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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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