दर्शन Poem by C. P. Sharma

दर्शन

जीवन का अंतिम सत्य समर्पण है
भक्ति में माया दर्पण नहीं
विनम्र अर्पण है
भटकन नहीं
दर्शन है।

पांडित्य में अहंकार है
इस में पागलपन है
मन मुटाव है
टकराव है
दुर्लभ है
दर्शन।

कर्म गति गहन है
विहित कर्म
धर्म है
पूजा है
योग है
दर्शन है।

जीवन में ही मार्ग है
स्व विसर्जन का
आत्म दर्शन का।

चुनाव आपका है:
ज्ञान मार्ग?
कर्म मार्ग?
भक्ति मार्ग?

दर्शन
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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