कब तक चलेगी ये आपदा, कब तक दिखेंगे ये दृश्य?
कब तक भ्रमित मुद्रा से मुक्ति का पूरा होगा लक्ष्य?
लूट-पाट भ्रष्टाचार लिप्त ये हमारा लोकतंत्र,
कष्ट दायक मुक्ति हैं इसके यन्त्र मंत्र तंत्र।
ये वो विभीषिका जिस में गरीब-ओ-इमां बलि चढ़े,
इन गिरगिटी चुनावों की मासूमों को न समझ पड़े।
सत्तर साल में जो ला खड़ा किया इस कगार,
वो उल्लू बना रहे हैं हमे, बन हमारे वफादार।
मुक्ति के नए दीवानो को अब वाज़िब वक्त दो, ,
मजबूत करो इन को, कुछ न करें तो सजा दो।
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