प्यार करते नहीं, प्यार हो जाता है।
प्यार की मुश्क़ में, इंसां खो जाता है।।
प्यार की दुनिया में ऐसी ज़न्नत बसे।
इस में नफ़रत का नमो-निशां न मिले।।
यहाँ भी प्यार है, वहाँ भी प्यार है।
हर जगह प्यार का ही सरोकार है।।
प्यार में डूब हुआ सारा संसार है।
लगा ले डुबकी, तू भी हो जा निहाल।।
सांसों की माला में प्यार के मणके।
मैं तो हूँ बस अब शरण प्यार के।।
हर पल फिरूँ मैं इस माला के संग।
इसी में है राधा, इसी में है श्री रंग।।
मीरा में समाई लाली लाल के संग।
कृष्ण प्यार बसा था राधा के अंग अंग।।
तू रंग ले खुद को किसी के प्यार में।
ख़ुदा के अगणित नाम हैं संसार में।।
उसे ईसा, अल्लाह या नानक कहो ।
हर हाल में मोहब्बत के हामी रहो।।
मोहब्बत के बदौलत ये दुनिया बसी।
सदा मोहब्बत के ही गीत गाते रहो।।
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