Dr. Navin Kumar Upadhyay


साथ रहते सदा, आसमाँ वे तकते रहते हैं। - Poem by Dr. Navin Kumar Upadhyay

साथ रहते सदा, आसमाँ वे तकते रहते हैं।
जाने क्या सोच-सोच, वे मुस्कुराते रहते हैं।।
ख्याल में क्या रहते, उनके जुदा मन सदा,
इसीलिए उनकी आँखें, ऊपर ओर लखते हैं।
कभी-कभी नींद भी लेती, उनको आगोश में,
तब भी उनके अरुण-अधर, करतब करते रहते हैं।
अधराधर रहते बँद, उमड़ता रहता सदा तूफान,
लेकिन जब कुछ बोल पड़ते, प्यार उमड़ पड़ते हैं।
नयनों को हेरो मेरी ओर, कह दो बस इक इशारे से,
'नवीन'तेरे अधर-मिलन हेतु, हम तड़पते रहते हैं।

Topic(s) of this poem: nature


Comments about साथ रहते सदा, आसमाँ वे तकते रहते हैं। by Dr. Navin Kumar Upadhyay

There is no comment submitted by members..

Langston Hughes

Dreams



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Saturday, March 11, 2017



Famous Poems

  1. Still I Rise
    Maya Angelou
  2. The Road Not Taken
    Robert Frost
  3. If You Forget Me
    Pablo Neruda
  4. Dreams
    Langston Hughes
  5. Annabel Lee
    Edgar Allan Poe
  6. Stopping By Woods On A Snowy Evening
    Robert Frost
  7. If
    Rudyard Kipling
  8. I Do Not Love You Except Because I Love You
    Pablo Neruda
  9. Do Not Stand At My Grave And Weep
    Mary Elizabeth Frye
  10. Television
    Roald Dahl
[Report Error]