सुबह उठकर
शुक्रवार, २५ सितम्बर २०२०
मुझे आदत सी हो गयी
इबादत करना मेरी दिनचर्या हो गयी
सुबह उठकर उनका ध्यान धरना
फिर ही अपना काम करना।
कभी चूक हो जाय तो मानो दिन बिगड़ गया
जैसे मेरे हाथ से असली हीरा चला गया
इसके जैसा आनंद कहाँ मिलना है?
प्रभु की शरण में जाना एक सौभाग्य होता है।
शरीर में ऊर्जा का आभास होता है
मानो कण कण में सत्य के होने का एहसास होता है
गलत काम करने के लिए पाँव ही आगे नहीं बढ़ते
बस दिन अच्छा कट जाता उसका नाम रटते रटते।
हमारी क्या विसात है?
ये हमारी विरासत नहीं है
हम सिर्फ मुसाफिर है कुछ दिनों के लिए
अच्छे काम करके चले जाना है सदा के लिए।
मानो तो वो अथाग सागर है
संसार हमारा भवसागर है
ना हमें तैरना आता है
नाही लहरों पर सरकना आता है।
बंदगी करनेपर कोई बंदिश नहीं
बस कृपा के लिए ईश की वंदना ही सही
हमपर उनका आशीर्वाद बना रहे
करुणा की धारा हमारी ओर से बहती रहे।
हम सब अभिमानी पुतले है
निकम्मे और दिलजले है
किसीकी अच्छाई बर्दाश्त नहीं कर सकते
बात-बात में लड़ाई-झगड़ा मोल लेते।
डॉ. जाडीआ हसमुख
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किसीकी अच्छाई बर्दाश्त नहीं कर सकते बात-बात में लड़ाई-झगड़ा मोल लेते। डॉ. जाडीआ हसमुख