साथ चलना है
शुक्रवार, २५ सितम्बर २०२०
कहीं दिप जले कहीं दिल
अब तो मुज से आके मिल!
नहीं कटते रात और दिन
बज नहीं पाती मेरी बिन।
मुझे अंधेरों से लगता डर
तू बसी है दिल के अंदर
बिन तेरे पाँव बढ़ते नहीं
मन को सुकून देते नहीं।
तूने कहा था "हम फिर मिलेंगे"
सारे जहां को अपना बनाएंगे
साथ रहेंगे, साथ मरेंगे
एक दूसरे से अलग नहीं होंगे।
भर दे मेरे जीवन में ऊझाला
दिल हो गया था मेरा काला
उजाले से मानो दूर हो गया
तूने आकर दिप जलाया।
तेरे बिना अब चैन कहाँ!
तू है जहां बस मेरा डेरा वहां
ले चल मुझे जहां तेरा दिल करे?
दिल अब तो बस एक माला जपे।
तेरे बिना उसपार जाना मुश्किल
छोड़ नहीं सकता में आज को कल
नैया पर सवार होकर हमें चलना है
बाकी जीवन सुख से साथ बिताना है।
डॉ जाडीआ हसमुख
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नैया पर सवार होकर हमें चलना है बाकी जीवन सुख से साथ बिताना है। डॉ जाडीआ हसमुख