इतने निष्ठुर! Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

इतने निष्ठुर!

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इतने निष्ठुर!
शुक्रवार, २५ सितम्बर २०२०

क्यों बन गए प्रभु क्रूर?
क्यों हो गए इतने निष्ठुर?
क्या आप भी जलन महसूस कर रहे थे?
आत्मपीड़न से कराह रहे थे!

हम तो वितीत कर रहे थे संसार?
आप की लीला का ले रहे थे सार?
आपकी माया थी अपरम्पार
हम अबोध नहीं पा सके उसका पार।

आप ने उसे उठा लिया?
उसने क्या कुसूर किया?
आपको देखे बिना वो जल तक नहीं पीती थी
दूसरों को खिलाए बिना खुद नहीं खाती थी।

वो थी तो मेरा संसार हराभरा था
कोई भी कमी का एहसास नहीं होता था
सुबह -शाम मानो पानी की तरह चले जाते थे
हम को प्यार में भिगोये सन्देश दे जाते थे।

प्रभू आपने एक ही पल में मुझे अकेलादिया
वास्तविकता की जमीं पर एकदम ही खड़ा कर दिया
मेरी सजा आपने उसे दे दी
अपनी मनमानी जरूर दिखा दी।

मुझे अब ज्ञात हुआ की सुख क्षणभर का है
जीवन दूभर करने का एक तरिका है
मानो तो स्वर्ग भी है यहीं ओर नरक भी
इंसान मान ले और सत्य की और सरक भी ले।

ना माना ओर समजा मैंने सकळ लीला
संसार लगा मानो सोने सरीखा पीला
हर जगह मुझे चमक ही नजर आई
उसके पिछे छिपी आसुरी माया नजर नहीं आई।

खैर, अब तो मेंहो गया एक मामूली इंसान
आपने ठिकाने ला दी मेरी सान
बचा-कुचा अभिमान आपने तहस-नहस कर दिया
मेरे अंदर के शैतान को लम्बी नींद सुला दिया।

डॉ जाडीआ हसमुख

इतने निष्ठुर!
Friday, September 25, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 25 September 2020

Poem: 59255454 - इतने निष्ठुर! Member: Rajnish Manga Comment: अत्यंत भावुकतापूर्ण उदगार अपने में समेटे करुण रस की एक प्रभावशाली रचना. जीवन में सुख के साथ दुःख भी मिलते हैं और मनुष्य के धैर्य की परीक्षा लेते हैं. धन्यवाद.

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Rajnish Manga 25 September 2020

अत्यंत भावुकतापूर्ण उदगार अपने में समेटे करुण रस की एक प्रभावशाली रचना. जीवन में सुख के साथ दुःख भी मिलते हैं और मनुष्य के धैर्य की परीक्षा लेते हैं. धन्यवाद.

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 25 September 2020

बचा-कुचा अभिमान आपने तहस-नहस कर दिया मेरे अंदर के शैतान को लम्बी नींद सुला दिया। डॉ जाडीआ हसमुख

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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