मैं पुराने ज़माने की दादी और पीढ़ी का अंतर
क्या मेरा इतना कसूर हैं,
कि मैं दादी हूँ,
एक पुराने ज़माने की दादी...! ! !
तुम्हें भी प्यारी - प्यारी कहानियाँ सुनाना चाहती हूँ,
और तुम्हारे साथ वो प्यारी - प्यारी लोरियाँ,
जिन्हें मैं अपनी दादी से सुनती थी,
उन्हें तुम्हारे साथ गुनगुनाना चाहती हूँ
पर मेरी कहानी तुम सुनते नहीं ।।
मैं तुम से बात करना चाहती हूँ,
पर तुम मुझसे कोई बात करते नहीं ।।
क्या मैं इतनी बुरी हूँ, जो मुझे नज़र अंदाज कर जाते हो,
मेरी छोटी - छोटी बातों को यूँही झटक जाते हो।
शायद दादी हूँ ना...! ! !
एक पुराने ज़माने की दादी....! ! !
वो दादी जो कभी तुम्हारे पापा की "दोस्त" हुआ करती थी,
उसकी छोटी - छोटी बातों को बड़े ध्यान से सुना करती।।
उसके एक - एक चीज़ का ध्यान, बड़ा ध्यान रखा करती,
पर शायद अब मैं तुम्हें अपना दोस्त बनाना चाहती हूँ।।
तुम्हें अपने गले लगाना चाहती हूँ,
कभी सोचा तुमने, कि मेरे सीने मे कितने अरमाँ हैं,
तुम्हारे साथ खेलने के, बात करने के, किस्से कहानी सुनने और सुनाने के।।
पर शायद वो अरमाँ, अरमाँ बन कर ही रह गये,
और मैं एक कोने मे चुपचाप सिमट कर रह गये।
क्युकी मैं दादी हूँ,
एक पुराने ज़माने की दादी...! ! !
जानती हूँ मैं की जब तुम्हारे दोस्त घर पर आते हैं,
तुम यूँही मुझसे नज़रे चुराते हो,
शायद तुम्हें मुझे दादी ना कहना पड़ जाये।।
जब वो तुमसे इंग्लिश मे पूछते हैं,
Who is she? ?
तब तुम कहते, "She is a old lady",
और तुम सब हँस जाते,
धीरे से मेरा मज़ाक उड़ा जाते।।
पर मैं बुरा नहीं मानतीं,
क्युकी मैं दादी हूँ,
एक पुराने ज़माने की दादी...! ! !
शरद भाटिया
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Haan purane zamane ke hoon zaroor Par etne badhoosh mai nahi Bhale tumhe mujhe aapnana mushkil ho Par aaj bhi mai tumhe saahara dene ke liye khadi hoo Sayad kabhi tumhe meri zaroorat ho Par tum aaj ke zamane ke ho na Boodhe bekar logon se kya kaam.... Bahut umda khayal hai aur bahut aache tarah se chitrit kiya aapne. Dhanyawad.