ज़िन्दगी Poem by C. P. Sharma

ज़िन्दगी

बड़ी दिलचस्प है
अपनी कहानी
जिया क़िरदार तो
इसे पहिचाना

ख़ुदी के बिना
जिया तो क्या जिया
जो ख़ुद से जिया
समां बदल दिया

कृष्ण का क़िरदार
उसकी ललकार है
गोवर्धन का उसमे
सम्मान सत्कार है

ईसा चढ़े थे क्रॉस पे
औरों के लिए परिहार
करोड़ों लोग ने उनके
पथ को किया स्वीकार

गाँधी ने उठाई थी
न बन्दूक, न तलवार
दिला दी थी आज़ादी
हम न पाए संभाल

ये ज़िन्दगी उसी की है
जो औरों के लिए जिया
जो अपने लिए जिया
वो भी है क्या जिया! ! !

ज़िन्दगी
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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