आदमी क्यों उदास हैै? Poem by C. P. Sharma

आदमी क्यों उदास हैै?

सर्वत्र प्रेम का प्रवाह
प्रकृति में है बह रहा,
फिर भी ये मनुष्य क्यों
दुःख भरे क्षण सह रहा! ! !

सुबह की किरण के साथ
चमन के फूल खिल उठें,
पक्षियों के प्रभात गीत से
संगीत प्रस्फुटित हो उठे।

शावक हिरण को साथ ले
माँ किल्लोल करने को चली,
सलिल स्वर्णिम सरिता भी
कलरव ध्वनि करती बढ़ी।

प्रकृति में सर्वत्र ही
एक नया उल्लास है,
ये आदमी क्यों थका है?
वो क्यों इतना उदास है?

आदमी क्यों उदास हैै?
Wednesday, April 19, 2017
Topic(s) of this poem: love,nature
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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