सुनहरा बसंत Poem by C. P. Sharma

सुनहरा बसंत

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कहीं गाये गीत बैसाखी के
कहीं नाचें रंगोली बिहू पे
केरल में नाचे गायें वीशू
कुदरत ये सब रंग बिखेरे
हर जगह बसंती ईलू ईलू

Wednesday, April 19, 2017
Topic(s) of this poem: spring
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 19 April 2017

भारत भर में फसलों की कटाई के समय को पर्व के रूप में बहुत हर्षोल्लास से मनाया जाता है. इस भावना को ही आपने कविता में सुन्दर अभिव्यक्ति दी है. हार्दिक धन्यवाद.

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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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