जीवन संगीत Poem by C. P. Sharma

जीवन संगीत

ये जीवन एक सरिता है
जो नित नित नित्य बहे
इसकी अविरल गति में
नित नव सुर संगीत चले

कविता जीवन सुर संगम
अनुपम, विचित्र, विहंगम
सुख दुख दो किनारे हैं
ये सरिता स्थावर जङ्गम

यहाँ नित नूतन पुष्प खिलें
इसमें पाप और पुण्य पलें
ठहराव के इस कीचड में
ये शृष्टि नित उपजे बिनसे

हूँ या नहीं हूँ ये
नहीं जानता मैं,
जीवन सरिता में
कविता सा बहे जा रहा हूँ मैं

जीवन संगीत
Wednesday, April 19, 2017
Topic(s) of this poem: life,music,river
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 19 April 2017

जीवन के उतार चढ़ाव, सुख दुःख तथा गलत सही विचार से समन्वित एक सुंदर कविता. धन्यवाद शर्मा जी. ये जीवन एक सरिता है /....कविता जीवन सुर संगम / अनुपम, विचित्र, विहंगम

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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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