हँसते, मुस्कुराते,
यूं ही खिलखिलाते,
ये ज़िन्दगी का सफर कट जाए।
क्या खोया, क्या पाया? इस सोच मैं,
मै न हँसा, न मुस्कुराया! ! !
मुस्कराहट में है मौसम की फ़िज़ा,
मुस्कराहट सब ग़मों की है दवा।
तलवार से भी पैनी है इसकी धार,
कभी भी खाली न जाए इसका वार।
मुस्कराहट ज़िन्दगी का नाम है,
मुस्कुराना ही ज़िन्दगी काम है।
मुस्कुराता रह तू, ऐ राहगीर,
मुस्कुराने से लगता, राह आसां है।
मुस्कुरा ऐ इंसां, ज़रा तूँ मुस्कुरा,
भूल जा तूँ नफरतों के गुब्बार को।
प्यार कर, फिऱ ज़रा तू मुस्कुरा,
बहिश्त बना ले तूँ इस संसार को।
प्रेरणा: Balika Sengupta जी का मुस्कुराता व्यक्यित्व चित्रण।
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