शब्दों के आँगन में Poem by Kezia Kezia

शब्दों के आँगन में

Rating: 5.0

शब्दों के आँगन में जब

सुरों का पंछी गाता है

वहाँ संगीत का मेला सा लग जाता है

कानों से मन में उतरकर

विचारों को चेतना देते हैं

आँगन में मीठी धुन फुदकने लगती है

शब्द इठला इठला कर चलते है

अपने होने का गुमान जताते हैं

शब्दों के संसार में

ना कोई हाहाकार है

ना प्रश्न है

ना कोई विस्मयबोधक है

अपने दायरों में रहते हैं

शांत दरिया में

चुपचाप बहते रहते हैं

अंत में मन चेतना खोकर

शून्य में विचरता है

***

Tuesday, October 6, 2020
Topic(s) of this poem: words
COMMENTS OF THE POEM
Varsha M 06 October 2020

Bahut bahut behatreen shabdo ke jugalbandi nausheen. Aati uttam. Alfaz kam ho jate hai aapke teranbazi talee. Dhanyawad.

1 0 Reply
Sharad Bhatia 06 October 2020

शब्द जो कभी नि शब्द थे आज बोल पड़े तुम्हारे आँगन मे बहुत - बहुत बेहतरीन कविता रचना 100+

1 0 Reply
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