बारिश Poem by C. P. Sharma

बारिश

जब हम तुम साथ चलेंगे
और रिमझिम बारिश होगी
ये छतरी हमारे संग होगी
पर बारिश से नही बचेंगे

जब थोड़ा सा तुम भीगोगे
और थोड़ा सा मै भीगूँगी
इन ह्रदय पटल पे कुछ
इस तरह तरंगे उठेंगी

तू कितना भी हो वैरागी
ये वैराग न टिक पायेगा
ये जोगिन तेरे संग होगी
तो तू प्रेम में रंग जायेगा

प्रेम तरंगे झंकृत होंगी
प्रेम लता बन मै लिपटूंगी
हम तुम जब प्यार करेंगे
ये प्रेम विलक्षण होगा

बारिश
Monday, May 15, 2017
Topic(s) of this poem: love,rain
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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