प्यार खुशबू है Poem by C. P. Sharma

प्यार खुशबू है

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प्यार के सिवा ज़िन्दगी क्या है?
जिधर देखो उधर प्यार का ही रिश्ता है।
इसे कोई नाम दे दो
आखिर है तो प्यार ही
किसी को माँ कहें
कोई हमशीर है
किसी को हमसफ़र
तो कोई आशिक़ है
प्यार में ही दोस्ती है
बिन प्यार दुश्मनी भी न हो
दोस्त से भी ज्यादा
दुशमन ही याद करे
प्यार हिन्दू नहीं
न प्यार मुस्लमान
प्यार की खुशबू से महके
सारा गुलिस्तां
ये नाम जिस्म के हैं
रूह का तो कोई नाम नहीं
प्यार तो रूहानी है
सब की रूह को प्यार करो
प्यार के सिवा इस दुनिया में रक्खा ही क्या है?
जिधर देखो उधर प्यार का ही रिश्ता है।

प्यार खुशबू  है
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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