मै आशिक़ हूँ Poem by C. P. Sharma

मै आशिक़ हूँ

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हाँ, मै आशिक़ हूँ,
खुल्लम खुल्ला प्यार करता हूँ।
प्यार में सारी
दुनियावी हदें पार करता हूँ।

नहीं रहती है रंग की पहिचान,
न ज़मीनी हदें जानू।
न मज़हबी ज़नून मुझ में,
मै हरकतों में इश्क़ पढ़ डालूं।

मै गुलशन के
हर एक गुल को चूमता हूँ।
मै पेड़ों की पत्तियों से भी
खूब खेलता हूँ।

मै सारे कुदरती
हकोहदूद भी जानता हूँ।
हर जीव का सम्मान है मुझे,
चाँद सूरज से गुफ्तगू करता हूँ।

हर शै को खूब पहचानता हूँ,
इश्क़ में सराबोर हूँ।
जानता नहीं नफ़रत क्या है?
बे हिसाब प्यार करता हूँ।

मै आशिक़ हूँ
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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