चमन की बहार
सोमवार, १२ अक्टूबर २०२०
चमन के अंदर रहूं या बाहर
तेजधूप हो या हलकी सी फुहार
में हमेशा बनता रहा गले का हार
लोग भी देते रहे सबको उपहार।
सदा महकता रहा
लोगों का मनपसंद रहा
जो भी आया मेरी सराहना करता रहा
में भी उनके गले का हार बनता रहा।
दूर से मुझे देखा तो लोग बहेक गए
मेरी खूबसूरती और महकपर आफरीन हो गए
हाथ ने चाहा मुझे पकड ले और जुड़े में डाल दे
पर तुरंत ही ऐसे बिचार को दफनादे।
में कुदरती उपहार हूँ
महकना मेरी आदत है
मेरी भेट कर लोग इबादत करते है
मुझे शरीर पे चढ़ाकर लोग शहादत को याद करते है।
रेगिस्तान मे दिख जाऊं तो चार चाँद लग जाए
गुलिस्तां में दिख जाउ बहार आ जाए
भगवान् की शरण में रख दो तो और खिल जाउ
सब की आँखों में मानो सितारा बन जाउ।
डॉ. जाडिआ हसमुख
भगवान् की शरण में रख दो तो और खिल जाउ सब की आँखों में मानो सितारा बन जाउ। डॉ. जाडिआ हसमुख
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भगवान् की शरण में रख दो तो और खिल जाउ सब की आँखों में मानो सितारा बन जाउ। डॉ. जाडिआ हसमुख