कामरेड बढ़े चलो Poem by Dr. Yogesh Sharma

कामरेड बढ़े चलो

कामरेड बढ़े चलो! जिहादी बढ़े चलो!

हाथ में पत्थ्रर रहे अस्त्र दल सजा रहे
तुम कभी डरे नहीं तुम कभी भगे नहीं
कामरेड बढ़े चलो! जिहादि बढ़े चलो।

सामने पोलिस हो वाटर गन की बौछार हो
तुम हिंसक डरो नहीं तुम दंगाई डटो वहीं
कामरेड बढ़े चलो! जिहादी बढ़े चलो।

कालिज हो कि जमात हो भीड़ हो न नेता हो
बेरिकेड तोड़ बढ़े चलो कानून तोड़ बढ़े चलो
कामरेड बढ़े चलो! जिहादी बढ़े चलो।

एक आतंक लिये हुए एक अंध-ज्ञान लिये हुए
वोट-बैंक के लिये सत्ता पीने के लिये
कामरेड बढ़े चलो! जिहादी बढ़े चलो।

तुमको आग लगानी है तुमको लिंचिंग करनी है
तुमको जाम लगाना है तुमको झूठ फैलाना है
कामरेड बढ़े चलो1 जिहादी बढ़े चलो।

कैब का मतलब जानते नहीं देश में उत्पात करना है
देश-वासियों से नफरत करनी है, घुसपैठिंयॉं से प्रेम करना है
कामरेड बढ़े चलो! जिहादि बढे‌ चलो।

जेहन में अज्ञान भरा दिल में घृर्णा भरी
जान भी निकाल लो खून भी बहा दो
कामरेड बढे चलो जिहादि बढ़े चलो।

कामरेड बढ़े चलो
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