Hasmukh Amathalal

Gold Star - 497,591 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

कुछ महोलत - Poem by Hasmukh Amathalal

कुछ महोलत

जीत हो गई तो क्या मिला?
अपने दिल को शुकुन मिला
पर दिल को फिर भी आराम कहाँ
जीत तो वही है जहाँ मिलता है ाकाः और जहां।

मार कर यदि सुख मिलता
सम्राट अशोक कभी गद्दी ना छोड़ता
अहिंसा का मतलब नहीं जानता
और अपनी मनमानी करता

जीवन एक जरिया है
दुःख का दरिया है
फिर भी हमें लगाव है
चाहे कितना भी तनाव है।

हम डुबे हुए है
माया के दुलारे है
सब चीज़ हमें चाहिए
अब आप ही कहिए!

होता हमें ना दुःख
यदि मिल जाता भैतिक सुख
साथ में ले जा सकते सब धनदौलत
और मांग लेते कुछ महोलत


Comments about कुछ महोलत by Hasmukh Amathalal

  • Mehta Hasmukh Amathalal (10/5/2017 10:45:00 PM)


    1 Aasha Sharma
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (10/5/2017 8:36:00 PM)


    कुछ महोलत

    जीत हो गई तो क्या मिला?
    अपने दिल को शुकुन मिला
    पर दिल को फिर भी आराम कहाँ
    जीत तो वही है जहाँ मिलता है ाकाः और जहां।

    मार कर यदि सुख मिलता
    सम्राट अशोक कभी गद्दी ना छोड़ता

    साथ में ले जा सकते सब धनदौलत
    और मांग लेते कुछ महोलत
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Poem Submitted: Thursday, October 5, 2017



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