जज्बात Poem by C. P. Sharma

जज्बात

जज्बात

जिस दिलमेज़ज्बात नहों
जज्बातों कीबारातन हो
वो दिल ही कहां, पाषाण है वो
चलताफिरताश्मशान हैवो

जिस दिलमेजज्बात रहें
कलकलसरितासंगीतबहे
लाहरों पे जीवन नृत्यकरे
महका मनआनन्द हिलौरेंले

बनजायेजीवनमहा रास
परोपकार की नमिटेप्यास
वो जीवन भीक्याजीवनहै?
यदि निजि स्वार्थ की त्रस्त त्रास! ! !

वो भी क्याकोईजीवन है?
यदि मातृभूमीकाप्यार नहो!
वोजीवनकैसाजीवनहै?
यदिउस मेभ्रातृभावन हो!

उस मानवजीवन मे क्या?
पशु-पक्षी मेलमिलाप नहो!
वो जीवन भी क्या जीवन है?
यदि जीवन मे वनवास न हो!

जीवनमूल-मंत्रसह-वास,
सारे मिल-जुल स्वस्थ विकास

जज्बात
Thursday, December 14, 2017
Topic(s) of this poem: feelings
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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