सपना सच करना
रविवार, १३ दिसंबर २०२०
चाहे कोई भी जुबा हो!
क्योंना वेशभूषा भी अलग हो!
दिल एक ही बोली बोलता है
अपनी मदहोशी मे खुद ही डोलता है।
दिल नहीं बताता खुलकर
बोलता है सोच-समझकर
"कहीं कोई बुरा ना मान ले"
कोई मेरी इज्जत पे डाका ना डाल दे।
भले ही कुछ समज नहीं आता हो
दिल आँखों को ये काम दे देता है
समजो आँखे कमाल कर देती है
प्यार की बोली को आँखों में समा देती है।
एक ही तीर काफी है घायल करने
प्रेमी को वश में कर दिया पायल की झंकार ने
आंखोकी बोली में वो लय होती है
जो आत्मा को विलय को और ले जाती है
नयनों का जादू
कभी नहीं करता जुदा
कर देता है एक वादा
रहना मेरे साथ सदा।
यदि नयन इतना कर सकता है
फिर दिल पीछे कैसे रह सकता है?
उसे तो हामी भरना ही है।
साथ में जीने-मरने कासपना सच करना ही है।
डॉ जाड़िआ हसमुख
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem