Monday, July 6, 2020

मैं अकेला हूँ मुझकोतू "माँ " चाहिए Comments

Rating: 5.0

मैं दुआओं का तेरे तलबगार हूँ
तेरी फ़ुर्क़त के ग़म में मैं बेज़ार हूँ
किस्से अपनी सुनाऊँ दिल-ए-दास्ताँ
तुझसा ग़मख़ार मेरा ना है राज़दाँ
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NADIR HASNAIN
COMMENTS
Rajnish Manga 06 July 2020

माँ को समर्पित एक भावपूर्ण कविता. धन्यवाद.

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Aarzoo Mehek 06 July 2020

A child's Heartfelt plea. Sensitive poem.

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