खुशाली Poem by Varsha M

खुशाली

Rating: 5.0

तुम रहो ख़ुश हर-पल
यही दुआ हमारी
न तो सोना और न ही चांदी
बस बागबान रहे घर तमारा।।

कदम कदम के हर मुश्किलें तुम्हारी
हसी ख़ुशी ले लेंगे हम सारी
बस तुम रहो नौनिहाल
तो खुशाली अपने आप हो जाये हमारी।।

बस इत्ती सी ख्वाइश हमारी
जबतक रहे अस्मा पर
चाँद और सितारे टिमटिमाते
रौशनी तुम्हारी जगमगाये घर सरे।।

Monday, December 21, 2020
Topic(s) of this poem: happiness
COMMENTS OF THE POEM
Sharad Bhatia 21 December 2020

बहुत बेहतरीन रचना आज निकली जो आपके दिल से जो दुआ, वो दुआ नहीं खुशहाली की शुरुआत हैं।। हमेशा दिल से निकली कबूल होती है आभार

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success