तुम रहो ख़ुश हर-पल
यही दुआ हमारी
न तो सोना और न ही चांदी
बस बागबान रहे घर तमारा।।
कदम कदम के हर मुश्किलें तुम्हारी
हसी ख़ुशी ले लेंगे हम सारी
बस तुम रहो नौनिहाल
तो खुशाली अपने आप हो जाये हमारी।।
बस इत्ती सी ख्वाइश हमारी
जबतक रहे अस्मा पर
चाँद और सितारे टिमटिमाते
रौशनी तुम्हारी जगमगाये घर सरे।।
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बहुत बेहतरीन रचना आज निकली जो आपके दिल से जो दुआ, वो दुआ नहीं खुशहाली की शुरुआत हैं।। हमेशा दिल से निकली कबूल होती है आभार