सुराही Poem by Varsha M

सुराही

Rating: 5.0

गर्मी जब चिलचिलाती हो तो
सुराही की सक्रा गला
तृप्त करता सूखता गला ।।

मनन भी अपना कुछ ऐसा ही है
दिखता हो तंग और सकरा
पर समा लेता विशाल जनता ।।

देता ठंडक धूप के बौछार से
अपना मन अच्छा
तो सबकुछ अच्छा ।।

Tuesday, December 22, 2020
Topic(s) of this poem: heart
COMMENTS OF THE POEM
Dr Dillip K Swain 22 December 2020

A sweet poem! Loved reading it..5 stars 🌟🌟🌟🌟🌟

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success