दुर्भाग्य से Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

दुर्भाग्य से

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दुर्भाग्य से

मंगलवार, १० जुलाई २०१८

जो मजा सोने में है वो खोने में नहीं
जो मजा हंसने में है वो रोने में नहीं
बसहंसो, खेलो और मौज करो
मन में आ जाय तो अच्छी अच्छी बातें करो

भला, रोने से किसी का भला हुआ है
दूसरे को बात कर ने से मन का बोज हल्का ही हुआ है
वोजिंदगी क्या काम की जो हमें ले डुबे?
रखे हमें सहमे सहमे।

खाना है तो गम खाओ
पर हमेशा मुस्कुराओ
सब को अपनी ख़ुशी का राज बताओ
जो मिले प्रेम से उसे गले लगाते जाओ।

हम ने नहीं बांटना
कौमी जहर और वेरभावना
वो तो पैदा कर देंगे दुर्भावना
फिर कहाँ से आएगी सदभावना?

हम सब ना गंवाए अच्छे पल
आज फिर नहीं आएगी कल
आज ही संवर जाओ अपने भाग्य से
नहीं कर पाओगे तो पायमाल हो जाओगे दुर्भाग्य से।

हसमुख अमथालाल मेहता

COMMENTS OF THE POEM

welcome deepak kotadia 1 Manage Like · Reply · 1m

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हम सब ना गंवाए अच्छे पल आज फिर नहीं आएगी कल आज ही संवर जाओ अपने भाग्य से नहीं कर पाओगे तो पायमाल हो जाओगे दुर्भाग्य से। हसमुख अमथालाल मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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