तुम्हारा, मेरा Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

तुम्हारा, मेरा

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तुम्हारा, मेरा

बुधवार, १८ जुलाई २०१८

गुट्टी पिलाने वाले बहुत मिल जाएंगे
सही सिख देनेवाले कभी नहीं मिलेंगे
आज के समय में दुखदर्द बांटे वो इंसान कहाँ है?
जहाँ देखो वहां अफरातफरी मची है।

दोस्त भी देखा दे जाते है
रिश्तेदार भी मुंह मोड़ लेते है
अरे अपने खुद के बच्चे पराए है
ऐसे में हमको अपने पराए खुद चुनना है

कुछ बुजुर्ग आपको मंदिर के पास बैठे हुए मिलेंगे
कोई पूछनेवाला नहीं उनको फिर भी आपको दुआ देंगे
आप सेमिलकर अपनी ख़ुशी जाहिर करेंगे
ओर समय आनेपर आपकी गमगीनी भी दूर करेंगे।

अपना गम भुला देते है और समय को नहीं कोसते
सबके साथ मिल बैठकर हंकार बातें करते
आपकी समस्या का समाधान पर उनके पास है
जीवन का निचोड़ उनकी बातों से झलकता है।

ऐसे बुझुर्ग अपनी वितक किसीको नहीं कहते
अपने किस्मत को दरकिनार करते जीते
दुनिया है और हम भी इसका हिस्सा है
बाकि ये सब तुम्हारा और हमारा किस्सा है।

हसमुख अमथालाल मेहता

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ऐसे बुझुर्ग अपनी वितक किसीको नहीं कहते अपने किस्मत को दरकिनार करते जीते दुनिया है और हम भी इसका हिस्सा है बाकि ये सब तुम्हारा और हमारा किस्सा है। हसमुख अमथालाल मेहता

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Anwesha Ghosh Thank you 😊 Manage Like · Reply · 3h

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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