एक सूत्र Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

एक सूत्र

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एक सूत्र
शुक्रवार, ३१ जुलाई २०२०

कमी ना थी कभी बंदगी में
जब तुम आ गई मेरी जिंदगी में
में तो दंग दांग रह गया ओर हो गया अचंबित
लोगो नेभी सहारा होकर बड़े अचंबित।

हम ने सदा रखा आप को सपनो में
पुरे खयालो में और ख्वाबो में
ना चेहरा याद रहता था और नाही ख़ुशी
बस चलती रहती थी मंजिल विनाशी।

आप साथ में बहार ले आइ
गुलशन के फूलों को भी सजा गई
महक उठा और खिल उठा मौसम में
चेहरे भी खिल उठे और बारिश हो गई बिन मौसम में।

कुछ कहा आपने और कुछ हमने भी
सुन ली बाते हमने सब की
मेल हो गया सब के कहने पर
ख़ुशी छा गई और बस रच गया संसार।

अब नहीं रहा किसी का इंतजार
उसके तो पहले से ही मिल गए थे आसार
जब बंध जाएंगे हम एक सूत्र
आनंद ही आनंद होगा सर्वत्र।

डॉक्टर हसमुख मेहता

एक सूत्र
Friday, July 31, 2020
Topic(s) of this poem: poem
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जब बंध जाएंगे हम एक सूत्र आनंद ही आनंद होगा सर्वत्र। डॉक्टर हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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