पिता क्या है?
रविवार, २७ दिसम्बर २०२०
पिता क्या है?
क्या तुम जानते हो?
क्या उसकी इज्जत मन में रखते हो?
क्या कभी उसका दिल दुखाते हो?
पिता वोही करता है
जो तुम्हारा सुहाता है
दिन में काली मजदूरी
फिर भी ना समझता मज़बूरी।
ना सोता रातभर, कल की चिंता
दिनभर टूट जाता, मेहनत करता
सुहाने सपने, मन में सजाता
वोही करता, जो तसल्ली दिलाता।
जन्नत यदि है तो
उसके स्वरूप में
मानो तो है एक अनूठा उदाहरण
मिल जाएगी आपको प्रभु की शरण।
ले ली है उसने दीक्षा
घर की पूरी सुरक्षा
वादा किया है निभाने का
गम है कोई दुसरा, उसे भुल जाने का।
पिताका है तुमपर भारी कर्ज
ना भूल जाना अपना फर्ज
उसके दिल को ना गम पहुंचाना
हो सके तो माफ़ी मांग लेना।
उठाता सारे जग का बोज
शांति की रहती उसे सदा खोज
कुटुंबकबिला उसकी, आँख के तारे
पारिवारिक सुख मिलता उसके सहारे।
यदि ना मिलता पिता का सहारा
हम गलगली फिरते बने बेसहारा
उसीकी गली में हमें मिला आसरा
उसीके पाँव में है जन्नत का नजारा।
डॉ जाडीआ हसमुख
Art: Dattatray
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