पल भर भी ओझल हो जाएं हम
तो मानो जैसे सांस आटक गई हो।।
खाने पर अगर नज़र न आए
तो गरमा गर्मी बहुत है।।
लो अगर लड़खड़ा गए अगर हम कभी
हाथ बढ़ाकर लोकने को तयार सभी।।
और मान लो कभी धोखे से गढ़े में गिर गए अगर
सारा परिवार साथ है हमे खींच निकालने के लिए।।
पल भर के लिखते अकेला क्या
वो तो पोरवाई की रुख भी बदलने के लिए उतारू खड़े।।
न जाने कैसे ये बंधन गहरे हो चले
पर परिवार हमेशा मेरी ताकत बने रहे।।
15.05.2021.
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Yahi hai sachcha parivaar, sab sath hain dukh mein aur sukh mein.5***