तमन्ना मेरी Poem by Varsha M

तमन्ना मेरी

Rating: 5.0

चांद ने चांदनी को चूम ही लिया
रात की रानी का चादर ओढ़े हुए
धीमे धीमे कदमों की आहट में।।

मंद मंद हवाओं के झोंके के मध्य में
लहराते हुए पत्तों की सरसराहट मे
वो पल चुरा ही लिया तेरे संग चलने का।।

चांदी का चादर ओढ़े हुए
चांद का आलिंगन करती मेरे ये नयन
जन्नत की सैर कर आए हम पल भर में यूंही।।

न जाने कब होगा संगम
पर वादा है ऐ हमदम
रहेंगे हम आपके जन्मों जन्म।।

चांद और चांदनी का ये अभिनय
दूर दूर तक देखे जमाना सारा
पर समझे ना ये इशारा गहरा।।

ओ! मेरे सनम अलबेले
समय की नज़ाकत समझें
और हमसे मिलने आ भी जाएं तड़के।।

न धूप न छांव
न ऊंचाई न गहराई
पर बेपनाही के लिए अब आ भी जाइए।।

नयन बिछाए आपके इंतज़ार में
भोर से रात हो चले
टूटे न मेरा विश्वास ये ध्यान रखिएगा।।

एड२८०६२०२१
वर्षा मधुलिका

तमन्ना मेरी
Monday, June 28, 2021
Topic(s) of this poem: hope,moon
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
I caught saught of a phrase in which words were chaand along with time wish. Photo Courtesy mobile wallpaper.
COMMENTS OF THE POEM
M Asim Nehal 28 June 2021

Nahi tutega ye bharosa, bus yaqin rakhiyega apne pyar per. Bahut khoob, padh kar dil gad gad ho gaya.10****

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