हरे हरे Poem by Dr. Yogesh Sharma

हरे हरे

हरे कृष्णा, हरे रामा, हरे भारत हरे हरे,
हरे देव भूमि, हरे वीर भूमि, हरे मातृ भूमि हरे हरे,
हरे ज्ञान भूमि, हरे संत भूमि, हरे तपो भूमि हरे हरे,
हरे धर्म भूमि, हरे दया भूमि, हरे त्याग भूमि हरे हरे।

जय केदारनाथ, जय बद्रिनाथ, जय तिरुपती हरे हरे,
जय गंगा, जय नर्मदा, जय गोदावरी हरे हरे,
जय हिमालया, जय विंध्याचल, जय गोवर्धन हरे हरे,
जय व्यास, जय वशिष्ठ, जय भारद्वाज हरे हरे।

जय रामायण, जय गीता, जय वेद हरे हरे,
जय काशी, जय मथुरा, जय अयोध्या हरे हरे,
जय प्रताप, जय शिवाजी, जय अर्जुन हरे हरे,
जय सोमनाथ, जय शैतान, जय मानिकशा हरे हरे।

युगौं युगौं मेरा भारत देश हरे हरे,
कोटि कोटि नमन भारत देश हरे हरे,
विश्व गुरु भारत देश हरे हरे,
हरे कृष्णा, हरे रामा, हरे भारत हरे हरे।

हरे हरे
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