अब के बरस बरसात आँखों से न होकर बादलों से हो तो अच्छा है
रात चाँद तारों संग न होकर उनके साथ हो तो अच्छा है I
जो उम्मीद के दिए जलाये रखे तूफानों में
ख़ामोशी में भी वो जलते रहे तो अच्छा है I
सफर की थकन से चेहरे पे शिकन दिखती है
उनकी एक मुस्कान मिल जाये तो अच्छा है I
ये जुदाई के लम्हात क्या सिला देंगे अब हमको
मिलान जो उन से हो जाये तो अच्छा है I
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Well written