अब के बरस बरसात आँखों से न होकर बादलों से हो तो अच्छा है Poem by M. Asim Nehal

अब के बरस बरसात आँखों से न होकर बादलों से हो तो अच्छा है

Rating: 5.0

अब के बरस बरसात आँखों से न होकर बादलों से हो तो अच्छा है
रात चाँद तारों संग न होकर उनके साथ हो तो अच्छा है I

जो उम्मीद के दिए जलाये रखे तूफानों में
ख़ामोशी में भी वो जलते रहे तो अच्छा है I

सफर की थकन से चेहरे पे शिकन दिखती है
उनकी एक मुस्कान मिल जाये तो अच्छा है I

ये जुदाई के लम्हात क्या सिला देंगे अब हमको
मिलान जो उन से हो जाये तो अच्छा है I

COMMENTS OF THE POEM
Suzon Albert 13 September 2021

Well written

0 0 Reply
Deepak S S 28 August 2021

Wah Wah sahi farmaya apne

2 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success