सोचना ही गलत Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सोचना ही गलत

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सोचना ही गलत
शुक्रवार, ४ फरवरी २०२२
काश तुम देख पाती
चिड़िया कैसे चहचहाती
अपना घोंसला बनाती
और बच्चोंको पालती।
बड़प्पन था बरगद के पास
फैलाता अपनापन आसपास
हर कोई आता और विश्राम पाता
थोड़ा सा सोकर गुनगुनाता
हम पत्थर मारकर फ़ल भी ले लेते
फिर भी उसे कोसते
ऐसा कभी नहीं हुआ
उसने कुछ ना दिया जब भी हमें छुआ।
पिता और माता
उन्हें हमेशा सताता
दिल से लड़की पढ़े
और हमेशा आगे बढे।
सब कुछ तो हमेशा दिया
अपने सुख का कभी ख्याल नहीं लिया
रातभर जागते रहे की तू कहीं सो ना जाय
परीक्षा में कही तू आंखोसे ना पिछड़ जाए।
दोस्तों मे तू सबसे ऊपर रहे
तेरा नाम चर्चा में बना रहे
ना तेरा चंचल स्वभाव इसकी ख़ुशी का रोड़ा बने
तू ख़ुशी से घूमे और सबको अपना बनाले।
माँ-बाप और दोस्त कभी कंटक नहीं बिछाते
बच्चोके लिए वो जान भी न्योछवर कर देते
अपने सुखोंसे वंचित रहकर बच्चोंका ख्याल रखते
मन ही मन मुस्कुराते रहते।
अपने दिल का बोज हल्का करो
उनके बड़प्पन को हमेशा याद रखो
पूरा जीवन समर्पित करो फिर भी कंम है
दिल में ऐसा विचार आना बी गलत बात है।
डॉ. हसमुख मेहता
साहित्यिकी

सोचना ही गलत
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
पूरा जीवन समर्पित करो फिर भी कंम है दिल में ऐसा विचार आना बी गलत बात है। डॉ. हसमुख मेहता साहित्यिकी
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 09 February 2022

Author Hasmikh Mehta welcome. Rashid Mirza Reply5 d

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Mehta Hasmukh Amathalal 09 February 2022

Hasmikh Mehta WELCOME..Alex Aguilera

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Mehta Hasmukh Amathalal 09 February 2022

welcome..Hasmikh Mehta WELCOME.. Gulberto Castro Castro

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Mehta Hasmukh Amathalal 09 February 2022

Author Hasmikh Mehta welcome Vinod Fullee

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Mehta Hasmukh Amathalal 09 February 2022

Author Hasmikh Mehta welcome.. Vinod Fullee

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Mehta Hasmukh Amathalal 09 February 2022

Author Hasmikh Mehta welcome..Mohammad Amin Reply5 d

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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