जब याद मेरी आये...... Poem by M. Asim Nehal

जब याद मेरी आये......

Rating: 5.0

खोल देना खिड़की को, रोज़ान आने देना
हवाओं में लहराना ज़ुल्फ़ें, होठों को दबा देना

एक याद ही तो है जिसे कोई रोक नहीं सकता
नज़र से और नज़रों से ये आ जाये ख्यालों से
मत रोकना इसे न बंद करने की कोशिश करना
आँखों से बहने देना जब याद मेरी आये...

मीठा सा दर्द होगा तन्हाई तुम्हें बुलाएगी
फिर से माला लिए कलियाँ भी आ जाएगी
चाँद छुपेगा बादलों के पीछे सितारे टीम टीमायेंगे
ख्वाबों को सजा देना जब याद मेरी आये.....

उड़ जाना तितलियों संग लहरें भी बन जाना
राग बन चलना और भवरें सा मचल जाना
साँझ का गगन रूप लेकर शबनम भी बन जाना
रात भर शम्मा सी रोशन होना जब याद मेरी आये....

खोल देना खिड़की को, रोज़ान आने देना
हवाओं में लहराना ज़ुल्फ़ें, होठों को दबा देना
जब याद मेरी आये.....

Saturday, February 12, 2022
Topic(s) of this poem: ghazal
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