कान्हा, राह दिखा दे!
जीवन दिया है तूने
मुश्किल लगे ये जीना
तेरे बिन में जीऊं कैसे? ..... राह दिखा दे!
कान्हा तू मेरा चहेता
हर पल ये दिल में रहता
तेरे बिन दिन कटें कैसे? ..... राह दिखा दे!
ओ.ओ...ऐसे मुंह मोड़ा ना करो
ना करो....ओ ओ.. ऐसे मुंह मोड़ा ना करो
रिश्ता यूँ तोड़ा ना करो
ना करो....ओ ओ.. रिश्ता यूँ तोड़ा ना करो
पगली हैं ये जो तेरी
झुकती नहीं है
जपति हैं माला तेरी
रूकती नहीं हैं
ऐसी सगाई हो तो,
तेरी जुदाई हो तो
नहीं जीना ये जहाँ से तू.. उठा ले
कान्हा तू मेरा चहेता
हर पल ये दिल में रहता
तेरे बिन दिन कटें कैसे? ..... राह दिखा दे!
(मेरी गल सुनो
दर्द कहेगी ये दिल के
मेरी गल सुनो
अर्ज करेगी दिलसे
तेरे प्यार के लिए मेरा दिया जले...जिया मेरा जले)
कान्हा तू मेरा चहेता
हर पल ये दिल में रहता
तेरे बिन दिन कटें कैसे? ..... राह दिखा दे!
A poem by my beloved child
Thanks for sharing this heartfelt devotion for God Kanha...very beautiful poem
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Crazy and deep devotion is reflected in this well written poem. A devotional relationship has deep impact in life. Hearing voice of God is great because this heals life and removes pain. He will definitely show the path. A nice sharing is done really.