बड़ी मुश्किल से सजाई है मैंने
जीवन में ज्योत और सीने में ज्वाला
तन्हाईयाँ तन्हा कहाँ है अब
तस्सवर की पहनी है मैंने माला
अंधेरों की हार हुई है और रोशन हुआ उजाला
किसी मुस्कराहट को अब नहीं इंतज़ार
किसी ख़बर का
दिल ने ये समझ लिया है
बहला न सकेगा इसको कोई नाला
निकल पड़ा है जब
ज़ोर और शोर से
पढ़ाव आते रहेंगे और जायेंगे
अब कहाँ थमने वाला है जीवन का काफिला
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