मैं और मेरी अदृश्य मोहब्बत
तेरे इस एहसास को स्पर्श करना चाहता हूँ,
तुझे एक बार गले लगाना चाहता हूँ ।।
जानता हूँ, तू अदृश्य हैं,
फिर भी तेरे आगोश मे सिमटना चाहता हूँ
तुझसे एक बार मोहब्बत करना चाहता हूँ।।
जानती हैं क्यूँ,
क्यूंकि एक तू ही हैं,
जो हमेशा मेरे साथ रहती है।।
चाहे दिन हो या रात,
जिंदगीभर का हैं तेरा मेरा साथ,
पैदा होने से मरने तक,
मेरी हर चीज़ पर हैं तेरा वास।।
मैं जानता हूँ.तू भी मुझसे मोहब्बत करती है,
जब मैं गुस्से मे होता हूँ,
तू मुझे अपने ठंडे स्पर्श से मुझे ठंडा करती है।।
और जब तू गुस्से मे होती है,
तो मुझे अपनी लपटों से जलाती हैं।।
शायद अपनापन जतलाती है,
और रह-रह मुझ पर गुस्सा कर जाती है।।
फिर मुझे सोचने पर मजबूर कर देती है, .
कि तू आज गुस्से मे क्यूँहैं।।
जब मैं अकेला होता हूँ,
तू मेरा पूरा साथ निभाती हैं।।
धीरे से आ कर मुझे अपने होने का एहसास करातीहैं,
और प्यार से मेरे बालो को सहलाती है।।
जब मुझे नींद नहीं आती,
तू मुझे अपनी ठंडी हवा की लोरी सुनाती हैं,
और मेरी अंखियों मे नींद लाती है।।
जब हम दोनों लड़ते हैं,
तू गुस्सा कर जाती और मुझसे बात बंद कर जाती,
तब मेरे दिल से पूछ मेरी तेरे बिना कितनी हालत खराब हो जाती।।
आज भी मैं तेरे होने का एहसास करताहूँ,
रोज़ शाम बालकनी तेरे साथ बात जो करता हूँ।।
कैसे कहूँ कि मैं तुझसे कितना प्यार करता हूँ,
शायद तू मुझसे जितना करती है, शायद उससे ज्यादा ।।
सुन तू"हवा"हैं, फिर भी मेरे साथ रहती है
देख कैसी तेरी मेरी मोहब्बत है,
तू दिखती नहीं, मैं दिखता हूँ,
फिर भी तुझसे मोहब्बत करता हूँ ।।
I love you so much my beautiful "invisible Air" and Thank youvery much for being a part of my life
एक प्यारा सा एहसास.
मेरी नन्ही कलम से-"मेरे अदृश्य प्यार" को
(शरद भाटिया)
Bahut khoob, aur hum sab isko chahte hain. Hai na. Sanse hain toh zindagi hai.
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Advitiya kavita jo pyaar ki kitaab ke andekhe panne ankhon ke saamne laati hai. Dhanyawad, Sharad ji.