हिंदी, हिंदुस्तान की भाषा, और इसकी परिभाषा है।।।।
इस की दशा, दिशा सुधरेगी, सबको ऐसी आशा है।
उर्दू की ये बहन है अपनी , इसकी अपनी शान है।
इस की भाषा है जन गण मन, इसका हिंदुस्तान है।।।
भारत के कोने-कोने में, बोली , समझी जाती है।।
छोटे बड़े, बच्चे बूढ़े को , हिंदी भाषा आती है।।।
देशज विदेशज का ये संगम, इस में क्रिया और विशेषण ।
अंग्रेज़ी के कारण बंधू , बहुत हुआ इसका शोषण ।
ज्ञान का दीप जलाकर हिंदी, उज्जवल भविष्य बनाती है।
निर्झर में गति है, यौवन है, ये हिंदी ही बतलाती है।।।।
है ज़ुबां, हमारी उर्दू पर, मैं हिंदी अक्सर लिखता हूं।
है उर्दू ज़ुबां से इश्क़ हमें, हिंदी से मुहब्बत करता हूं।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem