अये नौजवां Poem by Anjum Alinagari

अये नौजवां

Rating: 5.0

अये नौजवां तू है कहाॅ।।
रब ने तेरे लिए , है बनाया जहाॅ।।

है तेरी ये ज़मी, है तेरा आसमां।
अये नौजवां ।।।।।।।। तू है कहाॅ।।

सब्र से काम ले , हक़ को हक़ जान ले।
क्या सही क्या ग़लत, उसको पहचान ले।

अपनी परवाज़ पे रख तू अपनी नज़र।
ख़ुद को ऐसा बना, ख़ुश हो हर एक बशर।

अये नौजवां ।।।।तू है कहाॅ।
रब ने तेरे लिए , है बनाया जहाॅ।

मुल्क की शान बन, इसकी आवाज़ बन।।
हर सू इज्ज़त मिले , ऐसा इंसान बन।।

खौफ़ व दहशत का माहौल बनने न दे।
कोई लड़ना भी चाहे , तो लड़ने न दे।

है अमन का सबक़ , इसको तू याद रख।
तुझसे है सरज़मी , इसको आबाद रख।

अये नौजवाॅ ।।।।।।।।तू है कहाॅ।
रब ने तेरे लिए ।।। है बनाया जहाॅ।

रचना&लेख: -अंजुम अलीनगरी
, Darbhanga, Bihar)

अये नौजवां
Wednesday, January 18, 2017
Topic(s) of this poem: nazm
COMMENTS OF THE POEM
MOHD. HASAN 31 January 2017

nice

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MOHD. HASAN 31 January 2017

waah bhai bahut acche

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M Asim Nehal 18 January 2017

Bahut khoob..... खौफो दहशत का माहोल बनने न दे। कोई लड़ना भी चाहे, तो लड़ने न दे।

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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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