A-262 मेरा प्यार Poem by Amrit Pal Singh Gogia

A-262 मेरा प्यार

A-262 मेरा प्यार 1.4.17- 12.22 AM

मेरा प्यार मुझसे जुदा हो गया
हाय! ये मेरे साथ क्या हो गया

बड़ी शिद्दत से पाला था इसको
हर पल में संभाला था जिसको
दिल की हर धड़कन में बसा था
धड़कन को धोखा कहाँ हो गया

मेरा प्यार मुझसे जुदा हो गया
हाय! ये मेरे साथ क्या हो गया

बड़ी बेरहमी से मेरे क़रीब आए
ये बताने कि लो समझ आ गया
मिलन होता है जुदाई का नग़मा
लो इस नग़मे का समय हो गया

मेरा प्यार मुझसे जुदा हो गया
हाय! ये मेरे साथ क्या हो गया

कैसे भूल जाऊँ कुछ है ही नहीं
कैसे एकदम ख़याल आ गया
हक़ है उनको नख़रे जताने का
नख़रे में कहाँ दिमाग सो गया

मेरा प्यार मुझसे जुदा हो गया
हाय! ये मेरे साथ क्या हो गया

हैरान हूँ उनकी तबियत जात पर
कैसे उनको ये मलाल हो गया
एक पल मुझसे जुड़ा न होते थे
उनके ख़्यालों को क्या हो गया

मेरा प्यार मुझसे जुदा हो गया
हाय! ये मेरे साथ क्या हो गया
Poet: Amrit Pal Singh Gogia ‘Pali'

A-262 मेरा प्यार
Sunday, April 2, 2017
Topic(s) of this poem: love,love and life
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