आप मेरे क्या लगते हो? .. Aap Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

आप मेरे क्या लगते हो? .. Aap

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आप मेरे क्या लगते हो?
सोमवार, १६ दिसंबर २०१९

आप मेरे क्या लगते हो?
कभी पराये कभी, अपने लगते हो
हम ने ना जानी ये क्या गुत्थी है?
जो पराए को अपना बनाती है। आप मेरे क्या लगते हो?

सुबह ने ना जाना, रात ने ना जाना
पल मे हम सब ने मिट ही जाना
फिर सर पर क्यों बोझ लिए हो?
अपनों को पराया किए हो।आप मेरे क्या लगते हो?

मेरे दिल ने माना, फिर गुनगुनाया
तुम ना लगे मुझे कभी पराया
मेरे दिलको छू लिया, और हामी भर दी
जीवन की हर शाम को मेरे नाम कर दी। आप मेरे क्या लगते हो?

दिल का खालीपन खूब सता रहा
खूब किया मना फिर भी जाता रहा
उनकी आगोश मेंदिल, बहलाता रहा
उनकी हाँ में हा, मिलाता रहा। आप मेरे क्या लगते हो?

जीवन-मरण का अब हो गया नाता
फिर भी डर क्यों मन को सताता?
सारी सारी रात, खुब रुलाता
पर याद को ना जाने देता। आप मेरे क्या लगते हो?

ना जानू में कोई फलसफा
भले वो निकले, हो जाए बेवफा
मन मेरा ना विचले, दिल रहता सफा
झरना बेहता मानो, शान से गुफ़ा, आप मेरे क्या लगते हो?

ना मैने कहना, ना मैने सुनना
अपनी मस्ती में, धीरे से गाना
जब कह दिया, हो गया सपना पूरा
अब तो बस तू ही है, जीवन की धुरा। आप मेरे क्या लगते हो?

हसमुख मेहता

आप मेरे क्या लगते हो? .. Aap
Monday, December 16, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 16 December 2019

angelina rojas 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 16 December 2019

Eden S Trinidad 189 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 16 December 2019

ना मैने कहना, ना मैने सुनना अपनी मस्ती में, धीरे से गाना जब कह दिया, हो गया सपना पूरा अब तो बस तू ही है, जीवन की धुरा। आप मेरे क्या लगते हो? हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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