आस्था का प्रतिक... Aasthaa Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

आस्था का प्रतिक... Aasthaa

आस्था का प्रतिक
गुरूवार, १० जनवरी २०१९

कब आएगा कोर्ट का फैसला?
कब अपने मंदिर में प्रवेश करेंगे रामलला?
अस्थायी जगह पर अभी बिराजमान है
बाकि लोगों के बिच घमासान है।

राम के प्रति धार्मिक आस्था
और फिर उनकी हिफाजत और व्यवस्था
अब बन गई है क़ानूनी अखाड़ा
दोनों का अपना रुख है अड़ा।

हिन्दुओ के आस्था का प्रतीक
जाजरमान और देदीप्यमान अतित
पुराणकाल से चली आ रही भक्ति
यही तो देती है हमारे मन को शक्ति।

कहते है आततायीओ ने मंदिर को तोड़ा
मस्जिद बनाकर भक्तों का मनोबल तोडा
अब कुछ कुछ आसार दिख रहे है
मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ होता दिख रहा है।

अमनचैन का बस यही रास्ता है
सब को अपने अपने धर्म का वास्ता है
सुख-शांति में ही भगवान् राजी है
हमारा जज्बा ही इंसानी है।

हसमुख मेहता

आस्था का प्रतिक... Aasthaa
Thursday, January 10, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 10 January 2019

अमनचैन का बस यही रास्ता है सब को अपने अपने धर्म का वास्ता है सुख-शांति में ही भगवान् राजी है हमारा जज्बा ही इंसानी है। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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