अकेला
शनिवार, ८ दिसम्बर २०१८
मुझे लगता है में जीवन से हारा
एक ही तो था गरीब का सहारा
उसको भी प्रभु ने छीन लिया
मुझे अकेला इस दुनिया में छोड़ दिया।
में सोचते सोचतेथक सा गया
पुराने दिनों की याद में सरक गया
मेरे जीवन में कभी अन्धेरा नहीं छाया
जब भी उठा, ख़ुशी का माहौल छाया रहा।
हाथ जरूर तंग रहता था
पर खुशियों का ताता लगा रहता था
कोइ चीज की कमी महसूस नहीं होती थी
होती भी थी तो वो उसे सम्हाल लेती थी।
हरा भरा संसार और खुशियां ही खुशियां
बस भरा भरा रहा मेरा आशियां
किसी भी तरह की चिंता ने मुझे नहीं सताया
में खुशियां के मारे उछलता ही गया।
आज वो नहीं है
बस उसकी ही कमी है
सुख-चेन सब साथ ले गई
बस मुझे अकेला पीछे छोड़ गई।
हसमुख मेहता
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आज वो नहीं है बस उसकी ही कमी है सुख-चेन सब साथ ले गई बस मुझे अकेला पीछे छोड़ गई। हसमुख मेहता
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