अखंडता.... Akhandta Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

अखंडता.... Akhandta

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अखंडता
सोमवार, २५ फरवरी २०१९

हमने भी है ठानी
लिखना है खुद अपनी कहानी
तमन्ना है देशपर मर मिटनेकी
सबसे अलग नया भारत बनानेकी

देश के लिए हो जाएंगे कुर्बान
कुदरत भी हमपर रहेगी महेरबान
हमने बचानी है देश की शान
रखना है देशपर नाज और अभिमान

देश के खातीर मर जाना
हो जाना है आजादी का परवाना
बन के रहना है प्रहरी और रखवाला
बाकी सब बोल उठे "है वाकई में हिम्मतवाला "

मौत नसीब होगी तो शहीद कहलाएंगे
देश के लिए इतना तो कर ही पाएंगे
हमारा बदन बस उसीके लिए ही है
यही हमारा मकसद और तमन्ना है।

अब नहीं होगाकोई बंटवारा
देश रहेगा अखंड हमारा
हम उसकी अखंडता कीरक्षा करेंगे
जब भी मौक़ा मिला, जान भी न्योच्छावर कर देंगे।

हसमुख मेहता

अखंडता.... Akhandta
Monday, February 25, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 25 February 2019

welcome Bhadresh Bhatt 1 mutual friend Message

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Mehta Hasmukh Amathalal 25 February 2019

Tum Yang Hang Limbu 12 mutual friends

0 0 Reply
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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